विषय सूची (Table of Contents)
- परिचय : बवासीर क्या है ?
- बवासीर के प्रकार
- पुरुषों और महिलाओं में बवासीर का अंतर
- बवासीर के मुख्य कारण
- आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से बवासीर के प्रकार
- बवासीर के लक्षण
- आधुनिक उपचार (Modern Treatment)
- आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Treatment)
- पंचकर्म और क्षारसूत्र चिकित्सा
- घरेलू उपाय
- आहार और जीवनशैली
- कब डॉक्टर से मिलें ?
- वेदवती आयुर्वेद हॉस्पिटल की विशेषताएं
1. परिचय : बवासीर क्या है ?
बवासीर, जिसे अंग्रेज़ी में Piles या Hemorrhoids कहा जाता है, गुदा (anus) और मलाशय (rectum) के आसपास की नसों में सूजन, फैलाव या गांठ बनने की स्थिति को कहते हैं। यह एक सामान्य लेकिन असुविधाजनक समस्या है, जो आज के समय में तेजी से बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण अनियमित जीवनशैली, गलत खान-पान, लंबे समय तक बैठकर काम करना और शारीरिक गतिविधियों की कमी है।
जब मल त्याग के दौरान अधिक जोर लगाया जाता है या लंबे समय तक कब्ज बना रहता है, तो गुदा क्षेत्र की नसों पर दबाव बढ़ जाता है। धीरे-धीरे ये नसें फूल जाती हैं और बवासीर का रूप ले लेती हैं। कई मामलों में यह समस्या शुरुआती अवस्था में बिना दर्द के होती है, लेकिन समय के साथ इसमें दर्द, खून आना और सूजन जैसी समस्याएं जुड़ सकती हैं।
यह रोग पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करता है, लेकिन इसके कारण और प्रभाव दोनों में कुछ अंतर देखने को मिलता है। पुरुषों में यह अधिकतर खराब खान-पान, शराब सेवन और बैठे रहने की आदत के कारण होता है, जबकि महिलाओं में गर्भावस्था, प्रसव और हार्मोनल बदलाव इसके प्रमुख कारण बनते हैं।
आयुर्वेद में बवासीर को “अर्श” कहा गया है, और इसे एक गंभीर रोग माना गया है, जो शरीर के दोषों (वात, पित्त, कफ) के असंतुलन के कारण उत्पन्न होता है। यदि समय रहते इसका सही उपचार न किया जाए, तो यह समस्या जटिल रूप ले सकती है।
2. बवासीर के प्रकार
बवासीर को मुख्यतः दो प्रमुख प्रकारों में विभाजित किया जाता है। इन दोनों प्रकारों में लक्षण, स्थान और गंभीरता अलग-अलग हो सकती है, इसलिए सही पहचान और उपचार के लिए इनके बारे में जानना बहुत जरूरी है।
- आंतरिक बवासीर (Internal Piles) – आंतरिक बवासीर मलाशय (rectum) के अंदर विकसित होती है। यह शुरुआत में दिखाई नहीं देती और अक्सर दर्द रहित होती है, इसलिए कई बार मरीज को इसका पता देर से चलता है।
मुख्य विशेषताएं –
- मलाशय के अंदर होती है
- शुरुआती अवस्था में दर्द नहीं होता
- मल त्याग के दौरान खून आ सकता है (चमकीला लाल रक्त)
- गंभीर स्थिति में मस्से बाहर आ सकते हैं (Prolapse)
आंतरिक बवासीर को चार ग्रेड (Grade I से IV) में भी बांटा जाता है, जो इसकी गंभीरता को दर्शाते हैं।
- बाहरी बवासीर (External Piles) – बाहरी बवासीर गुदा (anus) के बाहरी हिस्से में होती है और इसे आसानी से महसूस या देखा जा सकता है। यह प्रकार अधिक दर्दनाक और असुविधाजनक होता है।
मुख्य विशेषताएं –
- गुदा के बाहर गांठ या सूजन के रूप में दिखाई देती है
- तेज दर्द और जलन होती है
- खुजली और असहजता बनी रहती है
- बैठने और चलने में परेशानी हो सकती है
- कभी-कभी खून भी आ सकता है
3. पुरुषों और महिलाओं में बवासीर का अंतर
बवासीर (पाइल्स) पुरुषों और महिलाओं दोनों में होता है, लेकिन इसके कारण, जोखिम और लक्षणों में कुछ महत्वपूर्ण अंतर देखने को मिलते हैं। यह अंतर मुख्य रूप से जीवनशैली, शारीरिक संरचना और हार्मोनल बदलावों के कारण होता है।
नीचे दी गई तालिका में इसे सरल रूप में समझा जा सकता है –
| पहलू | पुरुष | महिलाएं |
| मुख्य कारण | कब्ज, शराब का सेवन, लंबे समय तक बैठना | गर्भावस्था, हार्मोनल बदलाव, प्रसव |
| जोखिम | सामान्यतः अधिक (खराब जीवनशैली के कारण) | गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक बढ़ जाता है |
| लक्षण | दर्द, जलन, मल त्याग के समय खून | दर्द के साथ सूजन, दबाव और असहजता |
| उपचार प्रतिक्रिया | सामान्य उपचार से जल्दी राहत मिलती है | विशेष देखभाल और संतुलित उपचार की आवश्यकता होती है |
4. बवासीर के मुख्य कारण
बवासीर (पाइल्स) एक ऐसी समस्या है जो धीरे-धीरे विकसित होती है और इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं। अधिकतर मामलों में यह हमारी दैनिक आदतों, खान-पान और जीवनशैली से जुड़ी होती है। यदि इन कारणों को समय रहते समझ लिया जाए, तो बवासीर से बचाव संभव है।
आइए इसके प्रमुख कारणों को विस्तार से समझते हैं –
- कब्ज बवासीर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। जब मल सख्त हो जाता है और उसे बाहर निकालने में अधिक जोर लगाना पड़ता है, तो गुदा की नसों पर दबाव बढ़ जाता है। यह दबाव धीरे-धीरे सूजन और बवासीर का रूप ले लेता है।
- हमारे भोजन में फाइबर (रेशा) की कमी होने से पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता। इससे मल सख्त हो जाता है और कब्ज की समस्या बढ़ती है, जो आगे चलकर बवासीर का कारण बनती है।
- पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन हो जाता है। इससे मल सूखा और कठोर हो जाता है, जिससे मल त्याग के दौरान परेशानी होती है और बवासीर का खतरा बढ़ जाता है।
- लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने से गुदा क्षेत्र की नसों पर लगातार दबाव बना रहता है। खासकर ऑफिस में घंटों बैठकर काम करने वाले लोगों में यह समस्या अधिक देखी जाती है।
- अधिक वजन होने से पेट और निचले हिस्से पर दबाव बढ़ता है, जो गुदा की नसों को प्रभावित करता है। मोटापा बवासीर के जोखिम को काफी बढ़ा देता है।
- बार-बार भारी सामान उठाने से पेट के अंदर दबाव बढ़ता है, जो गुदा की नसों पर असर डालता है और बवासीर की समस्या को जन्म दे सकता है।
- मानसिक तनाव का सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ता है। तनाव के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे कब्ज और अन्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जो बवासीर को बढ़ावा देती हैं।
5. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से बवासीर के प्रकार
आयुर्वेद में बवासीर को अर्श कहा जाता है और इसे एक गंभीर रोग माना गया है, जो मुख्य रूप से शरीर के तीन दोषों – वात, पित्त और कफ के असंतुलन के कारण उत्पन्न होता है। आयुर्वेद के अनुसार बवासीर केवल एक शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि पाचन तंत्र की गड़बड़ी और दोषों के असंतुलन का परिणाम है।
आयुर्वेद में बवासीर (अर्श) को चार मुख्य प्रकारों में विभाजित किया गया है –
वातज अर्श – यह प्रकार वात दोष के बढ़ने के कारण होता है।
लक्षण –
- गुदा में तीव्र दर्द
- सूखी और कठोर गांठ
- कब्ज की समस्या
- मल त्याग में कठिनाई
कारण –
- सूखा, ठंडा और कम पोषक आहार
- अनियमित दिनचर्या
पित्तज अर्श – यह पित्त दोष के असंतुलन के कारण होता है।
लक्षण –
- जलन और तीव्र दर्द
- खून आना (रक्तस्रावी बवासीर)
- गुदा क्षेत्र में गर्माहट
- प्यास और चिड़चिड़ापन
कारण –
- अधिक मसालेदार, तीखा और गर्म भोजन
- शराब का सेवन
कफज अर्श – यह कफ दोष के बढ़ने से उत्पन्न होता है।
लक्षण –
- भारीपन और सूजन
- खुजली
- कम दर्द लेकिन असहजता
- चिपचिपा स्राव
कारण –
- तैलीय, मीठा और भारी भोजन
- शारीरिक गतिविधि की कमी
संनिपातज अर्श – यह सबसे जटिल प्रकार होता है, जिसमें तीनों दोष (वात, पित्त, कफ) असंतुलित हो जाते हैं।
लक्षण –
- तीव्र दर्द, सूजन और जलन
- खून आना
- पाचन तंत्र की गंभीर समस्या
- शरीर में कमजोरी
कारण –
- लंबे समय तक गलत खान-पान और जीवनशैली
- रोग का अनदेखा रहना
6. बवासीर के लक्षण
बवासीर (पाइल्स) के लक्षण इसकी अवस्था और प्रकार (आंतरिक या बाहरी) के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। शुरुआत में यह समस्या हल्की होती है, लेकिन समय के साथ इसके लक्षण गंभीर और कष्टदायक बन सकते हैं। इसलिए शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है।
आइए इसके प्रमुख लक्षणों को विस्तार से समझते हैं –
मल त्याग के समय खून आना – यह बवासीर का सबसे सामान्य और प्रमुख लक्षण है। मल त्याग करते समय ताजा लाल खून आ सकता है, जो आमतौर पर बिना दर्द के होता है (खासकर आंतरिक बवासीर में)। कई बार खून की बूंदें टॉयलेट सीट या टिश्यू पेपर पर दिखाई देती हैं।
दर्द और जलन – बाहरी बवासीर में गुदा क्षेत्र में तेज दर्द और जलन महसूस होती है। बैठने, चलने या मल त्याग के दौरान यह दर्द और अधिक बढ़ सकता है।
गुदा में सूजन – गुदा के आसपास सूजन या गांठ बन जाती है, जिसे आसानी से महसूस किया जा सकता है। यह सूजन कभी-कभी कठोर और दर्दनाक होती है।
खुजली (Itching) – गुदा क्षेत्र में लगातार खुजली होना भी एक आम लक्षण है। यह समस्या विशेष रूप से तब बढ़ जाती है जब सफाई ठीक से न हो या त्वचा में जलन हो।भारीपन और असहजता – गुदा क्षेत्र में भारीपन या दबाव महसूस होना, खासकर लंबे समय तक बैठने के बाद, बवासीर का संकेत हो सकता है। इससे व्यक्ति को असहजता और बेचैनी महसूस होती है।
7. आधुनिक उपचार
आधुनिक चिकित्सा (Modern Medicine) में बवासीर (पाइल्स) के उपचार के लिए विभिन्न तरीके अपनाए जाते हैं। इनका उद्देश्य मुख्य रूप से लक्षणों को कम करना, दर्द से राहत देना और सूजन को नियंत्रित करना होता है। बवासीर की अवस्था के अनुसार उपचार का तरीका चुना जाता है।
दवाइयाँ (Medicines: Painkillers & Creams) – शुरुआती अवस्था में डॉक्टर दर्द और सूजन को कम करने के लिए दवाइयाँ देते हैं।
इनमें शामिल हैं –
- Painkillers (दर्द निवारक दवाइयाँ)
- Anti-inflammatory creams (सूजन कम करने वाली क्रीम)
- Suppositories (गुदा में लगाने वाली दवाइयाँ)
फायदे –
- दर्द और जलन से तुरंत राहत
- सूजन कम होती है
सीमाएँ –
- यह केवल लक्षणों को नियंत्रित करती हैं
- बीमारी की जड़ को खत्म नहीं करतीं
Rubber Band Ligation – यह एक नॉन-सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें बवासीर के मस्से के आधार पर एक छोटा रबर बैंड बांध दिया जाता है।
कैसे काम करता है –
- बैंड लगाने से मस्से में रक्त प्रवाह बंद हो जाता है
- कुछ दिनों में वह सूखकर गिर जाता है
फायदे –
- बिना बड़ी सर्जरी के उपचार
- कम समय में प्रक्रिया पूरी
सीमाएँ –
- कुछ मामलों में दर्द या असहजता
- दोबारा होने की संभावना
सर्जरी (Surgical Treatment) – जब बवासीर बहुत अधिक बढ़ जाता है या अन्य उपचार काम नहीं करते, तब सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।
प्रमुख सर्जरी –
- Hemorrhoidectomy
- Stapled Hemorrhoidopexy
फायदे – गंभीर अवस्था में प्रभावी
सीमाएँ –
- दर्द और रिकवरी में समय लगता है
- खर्च अधिक होता है
- दोबारा होने की संभावना बनी रहती है
8. आयुर्वेदिक उपचार
आयुर्वेद में बवासीर (अर्श) का उपचार केवल लक्षणों को दबाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसे जड़ से समाप्त करने पर जोर दिया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह रोग पाचन तंत्र की गड़बड़ी और दोषों (वात, पित्त, कफ) के असंतुलन के कारण उत्पन्न होता है, इसलिए इसका उपचार भी उसी आधार पर किया जाता है।
आयुर्वेदिक उपचार में औषधि, आहार (Diet) और जीवनशैली (Lifestyle) — तीनों का संतुलन बेहद महत्वपूर्ण होता है।
आयुर्वेदिक उपचार की विशेषताएं –
- रोग के मूल कारण पर काम करता है
- पाचन शक्ति (अग्नि) को सुधारता है
- कब्ज को दूर करता है
- शरीर के दोषों को संतुलित करता है
- पुनः होने की संभावना को कम करता है
प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियां –
त्रिफला (Triphala) – यह तीन फलों (आंवला, हरड़, बहेड़ा) का मिश्रण है।
- पाचन सुधारता है
- कब्ज दूर करता है
- शरीर को डिटॉक्स करता है
हरितकी (Haritaki) –
- मल त्याग को आसान बनाती है
- वात दोष को संतुलित करती है
- पुरानी कब्ज में अत्यंत लाभकारी
अर्शकुटार रस –
- विशेष रूप से बवासीर के लिए बनाई गई औषधि
- सूजन और दर्द को कम करती है
- मस्सों को धीरे-धीरे खत्म करने में सहायक
अभयारिष्ट (Abhayarishta) –
- पाचन तंत्र को मजबूत करता है
- कब्ज को नियंत्रित करता है
- मल त्याग को नियमित बनाता है
9. पंचकर्म और क्षारसूत्र
आयुर्वेद में बवासीर (अर्श) के प्रभावी और स्थायी उपचार के लिए पंचकर्म और क्षारसूत्र चिकित्सा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ये दोनों विधियाँ शरीर को अंदर से शुद्ध करके और रोग के मूल कारण को समाप्त करके दीर्घकालिक राहत प्रदान करती हैं।
क्षारसूत्र चिकित्सा – क्षारसूत्र एक विशेष आयुर्वेदिक तकनीक है, जिसे बवासीर, भगंदर (Fistula) और अन्य गुदा रोगों के उपचार में अत्यंत प्रभावी माना जाता है। इसमें औषधीय (मेडिकेटेड) धागे का उपयोग किया जाता है।
कैसे काम करती है ?
- बवासीर के मस्से पर औषधीय धागा (क्षारसूत्र) बांधा जाता है
- यह धीरे-धीरे मस्से को सुखाकर जड़ से समाप्त कर देता है
- आसपास के संक्रमित ऊतकों को भी ठीक करता है
फायदे –
- बिना बड़े ऑपरेशन के उपचार
- जड़ से रोग समाप्त करने में सहायक
- दर्द और रक्तस्राव कम
- रिकवरी जल्दी होती है
- दोबारा होने की संभावना बहुत कम
पंचकर्म चिकित्सा – पंचकर्म आयुर्वेद की एक शुद्धिकरण (Detoxification) प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य शरीर से विषैले तत्व (टॉक्सिन्स) निकालकर दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करना है।
पंचकर्म के मुख्य लाभ –
- पाचन तंत्र को मजबूत करता है
- कब्ज को दूर करता है
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
- बवासीर के मूल कारणों को समाप्त करता है
प्रमुख प्रक्रियाएं –
- विरेचन (शोधन)
- बस्ती (एनिमा थेरेपी)
- अभ्यंग (तेल मालिश)
10. घरेलू उपाय
बवासीर (पाइल्स) के शुरुआती लक्षणों में कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर काफी हद तक राहत पाई जा सकती है। ये उपाय दर्द, सूजन और कब्ज को कम करने में सहायक होते हैं।
गुनगुने पानी से सिकाई (Sitz Bath) –
- दिन में 10–15 मिनट गुनगुने पानी में बैठने से गुदा क्षेत्र की सूजन और दर्द कम होता है
- रक्त संचार बेहतर होता है और जलन में राहत मिलती है
इसबगोल का सेवन –
- इसबगोल फाइबर का अच्छा स्रोत है
- यह मल को नरम बनाता है और कब्ज दूर करता है
- रात में गुनगुने पानी या दूध के साथ लेना लाभकारी होता है
एलोवेरा (Aloe Vera) –
- एलोवेरा जेल को प्रभावित जगह पर लगाने से जलन और खुजली में राहत मिलती है
- इसमें प्राकृतिक ठंडक और सूजन कम करने के गुण होते हैं
नारियल तेल –
- नारियल तेल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं
- इसे लगाने से खुजली, सूजन और जलन कम होती है
11. आहार और जीवनशैली
बवासीर के उपचार और बचाव में सही आहार और स्वस्थ जीवनशैली की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। गलत खान-पान इस समस्या को बढ़ा सकता है, जबकि संतुलित आहार इसे नियंत्रित करने में मदद करता है।
क्या खाएं –
- हरी सब्जियां (पालक, लौकी, तोरी) – फाइबर से भरपूर
- फल (पपीता, सेब, केला) – पाचन को बेहतर बनाते हैं
- फाइबर युक्त आहार – जैसे दलिया, ओट्स, साबुत अनाज
- पर्याप्त मात्रा में पानी (8–10 गिलास प्रतिदिन)
क्या न खाएं –
- मसालेदार और तला हुआ भोजन – पाचन खराब करता है
- जंक फूड – कब्ज और मोटापा बढ़ाता है
- शराब और धूम्रपान – नसों को कमजोर करता है
जीवनशैली में सुधार –
- रोजाना हल्का व्यायाम या योग करें
- लंबे समय तक बैठने से बचें
- समय पर भोजन और पर्याप्त नींद लें
12. कब डॉक्टर से मिलें ?
बवासीर के कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। निम्न स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से मिलें –
- लगातार खून आना – यह गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है
- असहनीय दर्द – सामान्य बवासीर से अधिक गंभीर स्थिति दर्शाता है
- सूजन का बढ़ना – संक्रमण या थ्रोम्बोसिस का संकेत हो सकता है
- मल त्याग में अत्यधिक कठिनाई
- कमजोरी या चक्कर (अधिक रक्तस्राव के कारण)
13. वेदवती आयुर्वेद हॉस्पिटल की विशेषताएं
Vedamrita Ayurveda Hospital (वेदवती आयुर्वेद हॉस्पिटल जैसे आयुर्वेदिक संस्थानों के मानकों पर आधारित)
वेदवती आयुर्वेद हॉस्पिटल एक ऐसा केंद्र है जहाँ पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का समन्वय करके मरीजों को सुरक्षित, प्रभावी और स्थायी उपचार प्रदान किया जाता है। यहाँ उपचार केवल रोग को दबाने के लिए नहीं, बल्कि उसके मूल कारण को समाप्त करने के लिए किया जाता है।
अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक –
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम, जो आयुर्वेद में गहरी समझ रखती है
- प्रत्येक मरीज की प्रकृति (प्रकृति विश्लेषण) के अनुसार उपचार
- व्यक्तिगत (Personalized) उपचार योजना
आयुर्वेदिक अस्पतालों में उपचार व्यक्ति की स्थिति के अनुसार तैयार किया जाता है, जिससे बेहतर परिणाम मिलते हैं
आयुर्वेद और आधुनिक तकनीक का समन्वय –
- पारंपरिक आयुर्वेदिक उपचार के साथ आधुनिक डायग्नोसिस
- रोग की सटीक पहचान और प्रभावी इलाज
- सुरक्षित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
आधुनिक और आयुर्वेदिक पद्धतियों का संयोजन बेहतर और संतुलित स्वास्थ्य परिणाम देता है
क्षारसूत्र और पंचकर्म विशेषज्ञता –
- बवासीर, भगंदर जैसे रोगों के लिए क्षारसूत्र चिकित्सा
- शरीर शुद्धि के लिए पंचकर्म थेरेपी
- बिना सर्जरी के प्रभावी उपचार
पंचकर्म शरीर से विषैले तत्व निकालकर दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुधार में मदद करता है
समग्र (Holistic) उपचार दृष्टिकोण –
- आयुर्वेद + योग + प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy)
- शरीर, मन और आत्मा — तीनों का संतुलन
- रोग के साथ-साथ जीवनशैली सुधार पर भी ध्यान
समग्र चिकित्सा पद्धति रोग के मूल कारण को ठीक करने पर केंद्रित होती है
व्यक्तिगत आहार और जीवनशैली मार्गदर्शन –
- मरीज को सही डाइट प्लान दिया जाता है
- दिनचर्या (Daily Routine) में सुधार
- रोग की पुनरावृत्ति रोकने पर विशेष ध्यान
ऑनलाइन और ऑफलाइन परामर्श सुविधा –
- घर बैठे आयुर्वेदिक परामर्श की सुविधा
- नियमित फॉलो-अप और मार्गदर्शन
- दूर-दराज के मरीजों के लिए भी आसान उपचार
आधुनिक आयुर्वेदिक अस्पतालों में ऑनलाइन कंसल्टेशन भी उपलब्ध है
सुरक्षित और प्राकृतिक उपचार –
- बिना साइड इफेक्ट के उपचार
- हर्बल औषधियों का उपयोग
- लंबे समय तक स्थायी परिणाम
वेदवती आयुर्वेद हॉस्पिटल जैसे संस्थान बवासीर (पाइल्स) के उपचार में एक प्राकृतिक, सुरक्षित और जड़ से समाधान प्रदान करते हैं। यहाँ केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि पूरे शरीर के संतुलन और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाता है।
यदि आप बवासीर से स्थायी राहत चाहते हैं, तो आयुर्वेदिक उपचार एक प्रभावी और भरोसेमंद विकल्प हो सकता है।